
कभी आपने देहाती औरतों को लडते हुए देखा है - हाथ चमका-चमका कर झगडा करेंगी और साथ ही साथ अपना काम भी करते जाएंगी । ईस झगडे मे धीरे-धीरे आस पडोस की अन्य औरतों के नाम आते जाएंगे और झगडा करने वालियों की संख्या बढती जाएगी, कभी कोई कहेगी - तू अपने वाले को क्यों नहीं देखती, दिन भर दीदा फाड कर यहां वहां आने-जाने वालियों को देखा करता है तो दूसरी कहेगी - और जो तेरा वाला झिंगुरी की बहुरिया से लटर-पटर करता है, वो -उसे कौन कोठार में तोपेगी। बस ईतना कहना होगा कि झिंगुरी की बहुरिया मैदान में हाजिर, फिर क्या - ऐसे-ऐसे देसी घी में तले हुए शब्द सुनने मिलेंगे कि बस , आप सुनते जाईये, लेकिन एक बात जो देखने मिलेगी वो ये कि ईनका काम कभी नहीं रूकता, उसी हाथ को चमका कर झगडा भी करेंगी, उसी हाथ से बच्चों के नाक को भी पोछती रहेंगी और उसी हाथ से जरूरत पडने पर एक दूसरे के बाल पकडकर झोटउवल भी कर लेंगी, लेकिन ईनका काम नहीं रूकेगा। एक दो दिन की मुह फूला-फूली के बाद खुद ही मेल-मेलौवल भी कर लेंगी।
कुछ यही हाल आपको बॉलीवुड में भी देखने मिलेगा, एक फिल्म स्टार दूसरे को गरियाता ही दिखेगा, कभी शाहरूख, अमिताभ को कुछ कहते सुने जाएंगे , तो कभी आमिर अपने को शाहरूख से आगे बताएंगे। अभी हाल ही में सलमान ने भी शाहरूख को अपना विरोधी करार दिया है, ईसके पहले अमिताभ और सलमान के बीच भी अनबन रहने की खबरें आती थी, पता चला कि अब दोनों में मेल-मिलौवल हो गया है और दोनों ही एक फिल्म - गॉड तुस्सी ग्रेट हो - में एक साथ आ रहे हैं, यानि ईनका काम कभी नहीं रूकता, चाहे जितना आपस में सिर-फुटौवल कर लें। इस बीच ये सिर-फुटौवल कभी-कभी दिखावटी भी होती है - फिल्म को प्रमोट करने के लिए, राखी जैसी तो ईस मामले में उस्ताद महिलाएं है ही - कभी मिका को लेकर हलकान रहेंगी तो कभी किसी टी वी शो को लेकर, और रह रह कर इनके काम करने के रेट बढते रहते हैं, यानि फिर वही बात - काम नहीं रूकना चाहिए, क्योंकि काम रूक जाएगा तो झगडा किस लिए करेंगे।
कभी-कभी सोचता हूं कि इन लोगों से अच्छी तो देहाती औरते हैं जो मन लगा कर झगडा करती है, ईन लोगों की तरह झगडा करने के पैसे तो नहीं लेतीं।
:)
- सतीश पंचम
कुछ यही हाल आपको बॉलीवुड में भी देखने मिलेगा, एक फिल्म स्टार दूसरे को गरियाता ही दिखेगा, कभी शाहरूख, अमिताभ को कुछ कहते सुने जाएंगे , तो कभी आमिर अपने को शाहरूख से आगे बताएंगे। अभी हाल ही में सलमान ने भी शाहरूख को अपना विरोधी करार दिया है, ईसके पहले अमिताभ और सलमान के बीच भी अनबन रहने की खबरें आती थी, पता चला कि अब दोनों में मेल-मिलौवल हो गया है और दोनों ही एक फिल्म - गॉड तुस्सी ग्रेट हो - में एक साथ आ रहे हैं, यानि ईनका काम कभी नहीं रूकता, चाहे जितना आपस में सिर-फुटौवल कर लें। इस बीच ये सिर-फुटौवल कभी-कभी दिखावटी भी होती है - फिल्म को प्रमोट करने के लिए, राखी जैसी तो ईस मामले में उस्ताद महिलाएं है ही - कभी मिका को लेकर हलकान रहेंगी तो कभी किसी टी वी शो को लेकर, और रह रह कर इनके काम करने के रेट बढते रहते हैं, यानि फिर वही बात - काम नहीं रूकना चाहिए, क्योंकि काम रूक जाएगा तो झगडा किस लिए करेंगे।
कभी-कभी सोचता हूं कि इन लोगों से अच्छी तो देहाती औरते हैं जो मन लगा कर झगडा करती है, ईन लोगों की तरह झगडा करने के पैसे तो नहीं लेतीं।
:)
- सतीश पंचम


6 Comments:
सतीश जी ,आप ने सच कहा हे,लेकिन यह देहात मे नही शहरो मे भी देखा जाता हे, मेने एक बार देख दो ओरतो की लडाई बच्चो के कारण हो गई, फ़िर मर्दो को बीच मे आना पडा, ओर बात पुलिस तक पहुच गई, अब ओरते तो चार दिन के बाद सहेलिया फ़िर से बन गई,मर्द बेचारे ...
आप ने इतना अच्छा बर्णन किया कि मजा ही आगया,धन्यवाद
सतीश जी, क्या वर्णन है लगता है बड़ी ही बारीकी से देसी महिलाओं को लड़ते हुए देखा है। अच्छा आंकलन।
बड़ा ही सूक्ष्म अवलोकन है बँधु-दोनों ओर!! सही है. :)
sahi tulna hai.mazaa aa gaya satish jee. badhai
हर जगह यही हाल है....बंधू....बस भाषा का फेर बदल है ...हिन्दी साहित्य में देखो....भाषा से गरियाते है....
रेलवे स्टेशन
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इन पैनी निग़ाहों के क्या कहने,
्विषय का अति उत्तम चुनाव
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