मुम्बई के किंग्स सर्कल स्टेशन पर एक अजीब वाकया हुआ । गाड़ी स्टेशन पर आकर लगी तो सभी यात्री फ़टाफ़ट चढ़ गए और प्लेटफार्म खाली हो गया लेकिन तभी सब की नजर प्लेटफार्म पर खड़ी एक महिला पर गयी जो की नाईटी पहने थी और अपने हाथ मे लिया हुआ टिफिनबॉक्स अपने पति को पकड़ा रही थी और पति था की टिफिन लेने को तैयार नही था , वो अपने पैरों के बीच मे अपना आफिस बैग दबाये हुए , अपने दोनों हाथ बाँध कर खड़ा था और अपनी पत्नी से बहस कर रहा था। पत्नी थी की टिफिन दिए जा रही थी और पति था की केवल न न करते हुए बहस कर रहा था , पत्नी कहे जा रही थी की देखो लोग देख रहे हैं लेकिन पति था की अपनी ही धुनकी मे था , वो लगातार कह रहा था की तू माँ से ऐसे कैसे बात कर रही थी या ये या वो ऐसी तमाम घरेलु बातों का जिक्र पति थोडी ऊंची आवाज मे कर रहा था । गाड़ी भी अक्सर जो तीस सेकंड से ज्यादा नही रूकती वो भी न जाने क्यों ज्यादा समय रुक गयी । लोगों की दिलचस्पी अब उनके झगडे मे बढतीजा रही थी , इतने मे एक नौजवान जो गाड़ी के दरवाजे पर ही खड़ा था बोल पड़ा , अरे जाने दो , काहे को टिफिन दे रही हो, बाहर बहुत वडापाव बीडापाव मिलता है , खा लेगा किधर । इतना सुनना था की लोग थोड़ा मुस्करा उठे , तबतक किसी और ने कहा चुतिये ले न , मालुम है बाहर जा के पहले होटल मे खायेगा बाद मे आफिस जायेगा। अब तो वो आदमी भी चुप हो गया और पत्नी ने गाड़ी के दूसरी और मुह फेर लिया , पति तब तक संभल गया था । चुपचाप , बैग लिया और स्टेशन के भीतरी हिस्से मे चला गया , पीछे पीछे पत्नी भी चली गयी । इधर गाड़ी भी चल पड़ी । मन मे तो आया की क्या
गाड़ी भी यही देखने रुकी थी । इधर डब्बे के अन्दर अलग चर्चा चल पड़ी की इधर कहीं आस पास की होगी तभी नाईटी मे ही पति के पीछे पीछे आ गयी , एक और बोला- अरे तो झगडा घर मे करने का , इधर स्टेशन पे थोडी ऐसा करने का, तब तक कोई और बोला तेरे बोलने का मतलब है लेकिन झगडा करने का । सुनकर डिब्बे मे थोड़ा ठहाका लग गया ।
9 Comments:
अच्छा चित्रण किया है वाकये का.
व्यक्तिगत मामले सार्वजनिक हो जाते हैं तो ऐसा हास्यास्पद हो जाता है।
पर मैं पत्नी का पक्ष लूंगा जो दौड़ती हुयी टिफन देने आयी थी।
मैं तो कहता हूं कि पत्नी को टिफिन देना ही नहीं चाहिए था, लेकिन क्या करें , भारतीय संस्कार हैं कि हावी हो जाते हैं।
सच है.
घर के झगडे बाहर जाते हैं तो लोगों के तमाशे का सामान बन जाते हैं.
मैं उन सज्जन कि पत्नी का समर्थन करता हूँ.
उनकी ये हरकत बेवकूफी से भरी थी.
hmmmm nice post,seems they should not fight in public,but still am the wifes side,she is so caring loving and husband dont want to hv that tiffen:(
जरूरी था यह वाक्या
इस पोस्ट के जरिए
आपसे मिलने का
हवाला का हवाले का
माध्यम बनना था
निवाला पति को
नहीं मिलना था
नहीं मिला.
होता वही है
जो राम रचि राखा.
सच कहा
सच कहा
सचाई ला ही दी आपने सामने सबके अब एकता जी के आगामी के के के के के वाले सीरियल में आपकी स्क्रिप्ट मागे जावेगी
खैर अच्छी पोस्ट की बधाइयां
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